Vision

 

Prerana Vidyalaya has been established with the intent to create a conducive environment for the growth of students with the guidance of the teachers and the management.

A conducive environment for the student refers to an environment that is: 

a. secure - to feel safe 

b. healthy - to have able bodies 

c. loving - to feel comfortable in sharing their thoughts 

d. thinking - to help them nurture their intellect and vreativity/innovativeness

e. expressive - to help them become confident 

f. interactive - to become sociable

 

We believe that the following practises and activities foster such a conducive environment:

a. Sambodhan - teachers address students as 'beta ji', students address each other as 'bhai ji' and 'didi ji', teachers address each other as 'bhaiyaji' and 'didi ji'

b. Audio - Visual Classes

c. Peer - Learning Classes

d. Music, Tabla, Dance and Sports Classes 

e. Spoken English Classes

f. Computer Classes

g. Chetna Vikas Mulya Shiksha ( Consciousness Development-Value Education )

h. Skill-based workshops - filmmaking, acting, craft, gardening, mechanics 

i. Educational workshops - such as, learning science through experiments, vedic maths, etc.

 

प्रेरणा विद्यालय विद्यार्थियों के विकास के लिए शिक्षकों व् प्रबंधक वर्ग के नेतृत्व में एक अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराने की दृष्टि से शुरू किया गया है।  

 

विद्यार्थी के विकास अर्थात:

  • स्वयं में विश्वास - आत्म-विश्वास के साथ सब के सामने व्यक्त होना
  • श्रेष्ठता का सम्मान - अपने से श्रेष्ठ व्यक्ति को पहचानना और उनसे समझना व् सीखना   
  • प्रतिभा और व्यक्तित्व में संतुलन - अपनी समझ और जीने में विकास और सोचने-बोलने-करने में सामंजस्यता
  • व्यवहार में सामाजिक - सभी रंग, जाति, नस्ल व्यक्ति के साथ भावपूर्ण जीना
  • व्यवसाय में स्वावलम्बी - श्रम करने व् हुनर सीखने के लिए मानसिकता बनना

 

विद्यार्थी के लिए एक अनुकूल वातावरण का अर्थ है:

१) एक सुरक्षित वातावरण

२) एक स्वस्थ वातावरण जहाँ बच्चों के शरीर की स्वस्थता पर ध्यान दिया जाये

३) एक स्नेहपूर्ण वातावरण जहाँ बच्चे सहज हो पाएं और बिना भय के अपनी बात कर सकें

४) एक चिंतनशील वातावरण जहाँ बच्चों को बुद्धिमान और सृजनात्मक बनने का अवसर उपलब्ध हो

५) एक अर्थपूर्ण वातावरण जहाँ बच्चों में आत्म-विश्वास बढ़े  

६) एक मिलनसार वातावरण जहाँ बच्चे सामाजिक बने  

 

ऐसे वातावरण को उपलब्ध कराने के लिए निम्नलिखित अभ्यास और गतिविधियां सहायक होंगे:

१) सम्बोधन - शिक्षक विद्यार्थियों को ‘बेटा जी’ कह कर पुकारते हैं, विद्यार्थी एक दूसरे को ‘भाई जी’ - ‘दीदी जी’ कह कर पुकारते हैं और शिक्षक एक दूसरे को भी ‘भैया जी’ - ‘दीदी जी’ कह कर पुकारते हैं

२) ऑडियो-विजुवल क्लास - जहाँ कठिन विषय को वीडियो के द्वारा सरल तरीके से समझाया जाता है

३) पीयर-लर्निंग क्लास  - जहाँ बड़े बच्चे छोटे बच्चों को पढ़ाते हैं ताकि उनमें अच्छे सम्बन्ध बने

४) संगीत, तबला, ड्राइंग, स्टोरी-टेलिंग क्लास - जिससे बच्चों में एकाग्रता और सृजनात्मकता बढे

५) नृत्य, खेल-कूद की क्लास - बच्चों के स्वास्थ्य और अभिव्यक्ति में निखार के लिए  

५) स्पोकन इंग्लिश क्लास - अंग्रेजी भाषा को सहजता से बोल पाए

६) कंप्यूटर क्लास - कंप्यूटर का प्रैक्टिकल उपयोग कर पाए

७) चेतना विकास मूल्य शिक्षा क्लास - बच्चों की जिज्ञासा को उत्तरित कर पाए और उनकी चेतना विकसित कर पाए

८) स्किल कार्यशाला - क्राफ्ट, गार्डनिंग, फिल्म मेकिंग, नाटक, इत्यादि

९) शिक्षा सम्बन्धी कार्यशाला - वैदिक गणित, विज्ञान सम्बंधित प्रयोग - विषय को समझना सरल करने और रुचि-कर बनाने के लिए